युगनिर्माण, स्वाध्याय और प्रेम विस्तार के बीच गुरुकृपा से बहती चेतना की कथा
गुरुचरणों में समर्पित जीवन, साहित्य प्रचार और प्रेम ऊर्जा का दिव्य विस्तार
जब गुरुदेव ने कहा — “आचार नहीं डालना , जन जन तक पहुंचाओ प्रेम रूपी साहित्य धारा”
स्वाध्याय से समष्टि तक — गुरुदेव की प्रेरणा से बहती प्रेम, सेवा और युगनिर्माण यात्रा
भूमिका
जब कोई कार्य अहंकार, प्रसिद्धि या प्राप्ति के लिए नहीं…
बल्कि केवल गुरु आज्ञा, प्रेम, स्वाध्याय और आत्मनिर्माण के भाव से होता है…
तो वही कार्य धीरे-धीरे युगनिर्माण की ऊर्जा बन जाता है।
यह काव्य केवल एक YouTube यात्रा या साहित्य प्रचार की कहानी नहीं…
बल्कि उस सूक्ष्म भाव का अनुभव है,
जहाँ गुरुदेव स्वयं अपनी बिटिया को साधते, गढ़ते और माध्यम बनाते दिखाई देते हैं।
अगर आप भी कभी सोचते हैं —
“जो मैं कर रहा हूँ उससे वास्तव में क्या होगा?”
तो संभव है इस काव्य में आपको उसका उत्तर मिल जाए।
Higlights
गुरुदेव बोले — “इनका अचार डालेगी क्या?”
स्वाध्याय से शुरू हुई प्रेम प्रचार की यात्रा
2177 वीडियो…और लक्ष्य फिर भी शून्य
youtube नहीं…ये गुरुकृपा का प्रवाह है
जहां प्रचार नहीं, प्रेम विस्तार मूल हो
महाकाल अपनी बिटिया से काम ले रहा है
लोकेषणा नहीं…बस गुरु आज्ञा आधार है
साहित्य तभी जीवित होता है जब प्रेम से जिया जाए
पहले आत्मनिर्माण…फिर स्वयं समष्टि निर्माण
ये चैनल नहीं…गुरुदेव की चलती हुई चेतना है
गुरुदेव की लेखनी से बहता प्रेम प्रवाह, स्वाध्याय से प्रचार तक की आत्मनिर्माण यात्रा
गुरुदेव बस ये बता दीजिए के वाकई कुछ लिखना है क्या?
एक पल का भाव था उसे भी वाकई अभिव्यक्त होना है क्या?
गुरुदेव बोले भाव एक पल का था
लेकिन ये भाव तो कई के मन मै हो सकता
तो भाव को उत्तर तो मिले यहां बिटिया
इसलिये अब सहज बहने दे कृष्ण की प्रेम ऊर्जा यहां
और बस ढीला छूट गया
जब लिखना है जो लिखना है लिख देना केशवा
ये बीती रात लिखा गया और सो गए
अब पुनः चिंतन चला
ये देह सारा दिन करती है क्या
कोई कॉर्पोरेट नौकरी..बिसनेस नहीं
कोई साधन पैसे जुटाने कमाने का नहीं
लेकिन काम तो सारा दिन का है यहां
और कमी किसी चीज की नहीं
क्योंकि गुरुदेव माताजी है परमपिता
स्वाबलंबन है, लेकिन नियम नहीं
दिल से दिल की आवाज कहीं
और सब कुछ सहज मैनेज
घर परिवार साथियों के साथ से होता सदा, आयाम हो चाहे कोई भी यहाँ
बीते कल जब youtube चैनल पर कुछ कुछ काम कर रहे थे
तो विचार मन मै ये उठा रहा था
गुरुदेव इस सबसे क्या होगा
क्या वाकई इससे युगनिर्माण होगा?
आत्मनिर्माण तो हो रहा इसमें कोई संशय नहीं यहां
पल पल गुरुदेव माताजी के सानिध्य मै कुछ तो दिव्य नया सीखते उसकी ऊर्जा को महसूस करते है
और उसके लिए सदा इस youtube का और youtube परिवार का भी आभार करते है
ये चैनल किसी कमाई का साधन नहीं है यहां
और ना ही इसका लक्ष्य कभी कमाई और मेंबर काउंट (Subscriber Count) रहा
इसको खोलने के पीछे भी नहीं रही कभी कोई इच्छा
क्योंकि इच्छा भी उसी काम की होती है जो थोड़ा बहुत कहीं आता हो
जैसे इस पल यहां बैठे बैठे ऐसे इच्छा नहीं हो सकती
के मै देश की PM बन जाऊं
क्योंकि पता है योग्यता नहीं
Globally कुछ समझ इस पल तक नहीं
ऐसे ही चैनल बनाने की इच्छा किसी क्रिएटिव व्यक्ति को हो सकती है
लेकिन मेरे जैसे को तो नहीं जिसे कोई दूर दूर इस फील्ड के अक्षर का भी था ज्ञान नहीं
तो निश्चित वो गुरुदेव की आज्ञा थी
2021 मै जब संदेश आया था
तो गुरुदेव के चरणों मै रखकर मन मुस्कुराया था
गुरुदेव ये सब तो आता नहीं
आप कह रहे है तो आप ही व्यवस्था करो स्वयं ही
और फिर सूक्ष्म की चिट्ठी समूहों के साथियों को दी
और एक भइया ने कहा
आप बस ऑडियो बना दीजिए दीदी
जैसे आप देवपरिवार के लिए बनाती है
बाकी सब हम देख लेंगे
और हंसी आ गई
गुरुजी तो बहुत मैजिकल है
कैसे कैसे काम करते है
और तब से आज तक एक अनवरत गहन
स्वाध्याय की यात्रा चली
आत्मविश्वास कैसे बढ़ाएं से लेकर
जन्मशताब्दी पुस्तक माला, गुरुदेव की वाणी के प्रवचनों के दिव्य देव संग्रह पढ़ा
और बस ये 100 किताबें ही नहीं
मैं क्या हूं, प्रेमयोग, आत्मा परमात्मा का मिलन संजोग
कृष्ण भक्ति, मां आनंदमई का चिंतन, गोपी भाव
जाने कितना कुछ पढ़ा गया जनाब
और पढ़ा नहीं, गहन चिंतन मनन हुआ
समूह की शक्ति गुरुदेव के आशीर्वाद से
पढ़ा हुआ व्यवहार मै उतरने लगा
स्वाध्याय का ये क्रम जो देवपरिवार से शुरू हुआ
इस पल तक अपने विस्तार पर है यहां
और इसके लिए इतना आभार है ब्रह्मांड का
हर पल हृदय कृतज्ञता महसूस करता
लेकिन शुरू के कुछ साल बस रिकॉर्डिंग मै बीते
और भाव बस स्वाध्याय का
जब तक गुरुदेव ने ध्यान की अनंत गहराइयों से ये महसूस नहीं करवाया के प्रचार भी आवश्यक है यहां
इसके बाद ये भाव काव्य रुक गया
कुछ एक घंटे बाद -
लेकिन अब इस पल महसूस हुआ
ये तो बहकर ही रहेगा
कारण तो नहीं पता
और इस काव्य में समष्टि के लिए कुछ है या नहीं जानते नहीं
लेकिन इस पल इस हृदय मै बस गुरु का चिंतन गहरा हो रहा
और कृष्ण प्रेम महसूस हो रहा
माताजी की वात्सल्य ऊर्जा से मानो देह रूपी बैग पूर्ण भरा हुआ
क्योंकि कृपा बिना कुछ चंद मिनटों मै ऐसा काव्य लिखा नहीं जा सकता
और जीवन का सर्वोत्तम पल वही होता है
जिसका आधार गुरु और विस्तार कृष्ण हो
जिसकी नींव बस प्रेम वात्सल्य करुणा हो
और फिर इसी क्रम में आगे
कान्हा लिखने लगे
कैसे गुरुदेव ने संत तुलसीदास जी के उदाहरण से प्रचार का महत्व समझाया यहां
उन्होंने रामचरितमानस लिखी और सहज भक्ति मै खो गए
और तब महाकाल ने कहा
ये क्या हो रहा है रामबोला
मात्र लिखा पर्याप्त नहीं होगा यहां
जीवन भर करो प्रचार प्रसार इस राम कथा का
और आशीर्वाद तुलसी की रामायण को अमृत्व का मिला
के जब जब जहां जहां होगी रामकथा
अंजनी नंदन सदा होंगे वहां
रामचरितमानस धर्मग्रन्थ बन गई और आज तक उसे पढ़कर आनंद होता सदा
और इसके बाद हृदय रोने लगा
अश्रु रुके नहीं
आगे जब गुरुदेव ने कुछ 2 वर्ष पहले शायद पूछा कहा
बेटा कितने वीडियो है चैनल पर
और हमने छोटे बच्चे वाले गर्व से खिलखिलाकर कहा 1200 होंगे गुरुजी
और गुरुजी ने ज़ोर से हुंकार भरी और कहा
तो इनका अचार डालेगी क्या
अरे इनको जन जन तक लेकर जाना भी तो आवश्यक है गुड़िया
कितनो तक जाएंगे तुम इसकी परवाह नहीं करना
तुम लेकिन कर्म तो करो बीज रूप से अपना
और वहां से शुरू हुई Channel के प्रचार की यात्रा
आज चैनल पर साथी जो डायरेक्ट जुड़े है
4800 (Subscriber) के आस पास है
सोचा नहीं था इतने भी होंगे कभी
और आगे ये परिवार कितना होगा जानते नहीं
देवपरिवार के साथियों को भी आभार है यहां
आपके माध्यम से
आपके साथ आशीर्वाद से
आपके होने के कारण
ही प्रश्नोत्तरी सीरीज बना
उपासना समर्पण योग का स्वाध्याय पूर्ण हुआ
महाकाल की युगपरिवर्तन प्रक्रिया से गुरुदेव को और गहरा आत्मसात किया
आत्मनिर्माण के सूत्र निज जीवन से को अपने अनंत स्नेह प्रेम सम्मान दिया
और गुरुदेव का Shreepriya Counselling Channel इसी प्रेम के एक और स्वरूप यहां
और आज इस पर 2177 वीडियो है
और जाने कितने आने तैयार है
और अब तो ये नई यात्रा शुरू हुई (2 साल पहले)
क्योंकि प्रचार तो कभी सोचा ही नहीं
ध्यान सदा स्वाध्याय और आत्मनिर्माण पर रहा
लेकिन गुरुदेव की लीला
काम आया तो साथी भी मिले
जितने भी वीडियो है चैनल पर
समूह के साथियों ने मिलकर एक एक वीडियो के नोट्स बनाकर दिए
इस समय तक ये AI नहीं आया था
या आया होगा तो पता नहीं था
सब काम बहुत समय लेता था
हालांकि उसी मै आत्मनिर्माण छुपा था
और आज भी हर काम AI से नहीं हो पाता
अब एक एक वीडियो पर नए सिरे से काम चल रहा है
सबके टाइटिल डिस्क्रिप्शन कवर पेज बदल रहे है
और इसी क्रम में बस सीखते चल रहे है
जिसे एकदम कुछ ना आता हो
उसके लिए ये सफर सरल नहीं
ऐसे मै youtube से लेकर canva filmora सीखने की यात्रा चली
लगा गुरुदेव इतना तो स्कूल मै नहीं मेहनत हुई
जितना अब 44 पार पर चल रही
हंसी आने लगी
क्योंकि इसी बीच एक और Baby आ गया
छोटा पैकेट बड़ा धमाका
Awgp Vangmay Channel का जन्म हुआ
जिसका उद्देश्य गुरुदेव के वाङ्मय को ऑडियो मै कन्वर्ट करना
और काम चल रहा नियमित साझेदारी है यहां
ये भी बस कृपा और समूह की शक्ति यहां
इसी क्रम में बीते कल जब चैनल के पहले के Data
JSPM जन्मशताब्दी के प्रवचन डेटा को सही कर रहे थे
तो सोचने लगे
गुरुदेव इससे क्या होगा
क्या वाकई इससे युगनिर्माण हो जाएगा?
विचार आया और गया
गुरुचरणों में रखा गया
क्योंकि लगा कुछ है या नहीं
ये सब करके गुरुदेव का चिंतन होता है
उनकी लेखनी ही उनका स्वरूप है
उसी के बीच घूमते रहते है
और क्योंकि मूल नींव ऊर्जा
ना तो सब्सक्राइबर काउंट बढ़ाना है
ना लाइक के पीछे का पागलपन
और ना पैसे के लिए काम ये चल रहा यहां
तो चिंतन बस स्वयं के निर्माण पर होता
एक एक लाइन पर जांच होती है सदा
बस अन्तर्जगत की यात्रा ये यहां
हालांकि अपना काम अच्छे से करना है
इनपुट उत्साह प्रेम शुद्धता और शिद्दत से जाता
और एक एक लाइक सबक्राईब कमेंट के लिए Gratitude आता
जहां से जो आ जाए सब महकाल को स्वयं अर्पित हो जाता
क्योंकि मेरा कुछ है ही नहीं यहां
जीवन से गुरुदेव हटा दो तो कुछ भी नहीं बचेगा
अब गुरुदेव ने मुस्कुरा कर कहा
इससे युगनिर्माण होगा या नहीं ये तो नहीं पता बिटिया
लेकिन इस सबसे मेरी एक बेटी का निर्माण हुआ
के मुझे गर्व है अपनी इस बेटी पर यहां
अपना दीपक आप बनो को जिसने सतत जिया
इस बेटी के हृदय रूपी प्रेम दीप अखंड रूप से प्रकाशित रहे सदा
यही इस पल तेरे गुरुदेव माताजी का आशीर्वाद और जगतजननी आदिशक्ति मां गायत्री से प्रार्थना
बेटे, माताजी ने तो बस यही कहा
पहले अपना निर्माण करो
और फिर तुम स्वयं बह जाओगे
क्योंकि तुम ही ना रह जाओगे
और वही से सब काम स्वयं हो जाएगा
ये जो सब साथी परिजन (Subscriber )इन तीन चैनल पर से सब सुनते है
इन सबका कितना निर्माण कैसे और कहां हुआ
इसका अंदाजा तुम नहीं लगा पाओगी बिटिया
इसलिए तुम बस सदा की तरह कहना मानो और चलो
लक्ष्य तुम्हारा कुछ है ही नहीं
तुम्हारा लक्ष्य तो बस गुरु का कहना मानना सदा
इसी के आधार पर चलते चलना बिटिया
आगे तो तुम्हारा ये गुरु इस देह को अपना
यंत्र, तीर, ढोलक, ढपली, शंख
बनाकर, अपना लक्ष्य साध ही लेगा
जैसे इस पल कर रहा
आगे गुरुदेव ने कई सारे साथियों को संबोधित करते हुए कहा -
जो भी बच्चे युगनिर्माण का काम, साहित्य का
प्रचार प्रसार कर रहे है
सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं साधुवाद आभार
यूं तो ये बात आप सबके अंतःकरण मै कई कई बार कही गई है
पर पुनः एकबार दोहरा रहे है
आपको अच्छी लगे तो स्वीकार कीजिए
नहीं समझे तो भी कोई बात नहीं
इस देह के माध्यम से कह रहे आपके गुरूवर ही
आप सब बहुत अच्छा कर रहे है
करते रहिये
लेकिन जो कर रहे है
वो क्यों कर रहे है इस पर भी गहन विचार कीजिए
साहित्य के प्रचार का उद्देश्य मात्र प्रचार नहीं
प्रेम का विस्तार है
और प्रेम बस देने की एक भावना सदा
प्रेम मै लेना देना नहीं होता
तो साहित्य रूपी इस प्रेम गंगा का प्रचार से पहले विस्तार करें
अपने अंतर्करण मै इसको इस प्रकार धारण करें
के ये सत्य हो जाए अस्तित्व चेतना का
गुण कर्म स्वभाव व्यवहार का
जब ये होगा तो भीतर प्रेम ही प्रेम महसूस होगा
और जब ये प्रेम की नींव से साहित्य का विस्तार होगा
तो उसका महत्व प्रचार से कई गुना हो जायेगा
एक एक चेतना मै ये अलख जगायेगा
और आपका नींव और मूल सही होगा
तो लोभ मोह लालच अहंकार किसी प्रकार नहीं सताएगा
लोकेषणा के विष को पचाना सरल नहीं होता
इसलिए समर्पण शरणागति ही रास्ता सदा
आप सबने ये काव्य यहां तक पढ़ लिया
ये भी बहुत बड़ी बात है यहां
अब ध्यान से इस काव्य के भाव की गहराई को देखिए
आप मेरा जो भी कार्य कर रहे
उसमें इस काव्य भावना के अमृत को जोड़ दीजिए
और पहले से यही जी रहे तो इस भावना का महत्व आप समझते है
इस बिटिया को अपना स्नेह आशीष सहयोग साथ दीजिए
क्योंकि जो तो आप रहे है
लेकिन फिर भी काव्य यहां से बह गया
इस देह की ये नहीं थी चाहा
बस ढीला छूटा और बह गया
ये लेखनी दो चार दिन या कई कई घंटे लगकर नहीं आई है
ये मात्र एक घंटे के समय मै बह गई
वो भी तब जब देह से बिटिया घर के भी कुछ कुछ काम कर रही थी
यहां बात आपको मानाने या प्रमाण देने की नहीं
के ये लेखनी भी इस बच्ची के गुरुदेव आपके महाकाल कहीं
क्योंकि सत्य स्वयं प्रकाशित है
और उसके प्रकाश को रोकना संभव नहीं
ये Channel कितनो तक जायेगा
इसकी परवाह इस बिटिया को नहीं
लेकिन महाकाल इस प्रेम प्रवाह को निश्चित ही गति देगा
और आप इसमें साथ दे सकते है
आपकी चाहा और रजा
आपका साथ एक आशीर्वाद है
चाहे तो एक experiment अपने गुरु के शरणागत होकर कीजिए
बस 40 दिन और हर दिन दो ऑडियो रोज के सुन लीजिए
आपकी आत्मा को उत्तर स्वयं मिल जाएगा
के यहां ऐसा खास विशेष अलग है क्या
बाकी ऐसा नहीं के ये केवल यहीं है
बाकी जगह भी है, होने की संभावना है
लेकिन इस पल बात बस यहां की हो रही है
आप सुनिए और महसूस कीजिये
आपका मन स्वयं इस भावना के विस्तार से जुड़ जाएगा
बिटिया की और से सभी को यथायोग्य प्रणाम
राधे राधे शारदे जगज्जननी जगदंबा
और महाकाल का स्नेह आशीष सबके संग सदा
हर जीवन को मिले दैवीय दिव्य दिशा
यही एक प्रार्थना आदिशक्ति मां गायत्री से बारंबार यहां
काव्य बह गया
और हम स्तब्ध इस पल यहां
कहने को कुछ नहीं रहा
पूर्ण मौन से ग्रहण कर रहे है इस
पल की ऊर्जा और भावना का प्रवाह
गुरुदेव आपको प्रणाम सदा सदा
राधे राधे शारदे जगज्जननी जगदंबा
10.18 AM
24 May 2026
आध्यात्मिक चिंतन बिन्दु
आत्मनिर्माण ही समष्टि निर्माण की प्रथम सीढ़ी है।
साहित्य का प्रचार नहीं, प्रेम का विस्तार मूल उद्देश्य होना चाहिए।
गुरुकृपा जब कार्य करवाती है तब योग्यता से अधिक शरणागति काम करती है।
स्वाध्याय यदि व्यवहार में उतर जाए तो वही चेतना परिवर्तन बनता है।
लोकेषणा का विष केवल समर्पण और शरणागति से पचता है।
जो कार्य अहंकार रहित होकर किया जाए वही युगनिर्माण का माध्यम बनता है।
गुरु जब किसी को यंत्र बनाते हैं तब साधारण जीवन भी दिव्य हो जाता है।
प्रेम से किया गया प्रचार चेतना में स्थायी प्रभाव छोड़ता है।
जहां लक्ष्य स्वयं नहीं, गुरु आज्ञा हो — वहीं साधना पूर्णता की ओर बढ़ती है।
सच्चा कार्य वही है जिसमें “मैं” धीरे धीरे विलीन होने लगे।
समापन
कई बार हम सोचते हैं — “हमारे छोटे से प्रयास से क्या बदल जाएगा?”
लेकिन शायद…
युगनिर्माण पहले संसार में नहीं,
एक हृदय में शुरू होता है।
और जब एक हृदय सच में गुरुचरणों में समर्पित हो जाता है…
तो वही प्रेम धीरे-धीरे अनगिनत चेतनाओं तक पहुँचने लगता है।
“साहित्य प्रचार का उद्देश्य प्रसिद्धि नहीं…प्रेम को चेतना से चेतना तक पहुंचाना है।”
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